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जानिठसबसे खतरनाक कैंसर के बारे में
à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से पता चला है कि फेफड़े के कैंसर से पीड़ित आधे लोगों की मौत छह महीने के अंदर ही हो जाती है।
कैंसर मरीजों के जीवित रहने की दर में बदलाव की निगरानी करने वाली संसà¥à¤¥à¤¾ मैकमिलन कैंसर सपोरà¥à¤Ÿ का कहना है कि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ जांच में बीमारी का पता लगाना ही बचने का मà¥à¤–à¥à¤¯ उपाय है। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, सà¥à¤¤à¤¨ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कैंसर के मामले में पांच वरà¥à¤· तक जीवित रहने की दर 80 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ होती है, जबकि फेफड़े के कैंसर के मामले में यह दर 10 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ है। फेफड़े के कैंसर से पीड़ित जो लोग पांच वरà¥à¤· तक जीवित रहते हैं उनमें किसी और कैंसर के शिकार होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ दस गà¥à¤¨à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है।
संसà¥à¤¥à¤¾ ने 2004 से 2011 के बीच इंगà¥à¤²à¥ˆà¤‚ड के लगà¤à¤— 85,000 कैंसर मरीजों के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया और रिपोरà¥à¤Ÿ तैयार की है।
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने उन लोगों के बारे में जानकारी इकटà¥à¤ ा की जो चारों पà¥à¤°à¤•ार के -सà¥à¤¤à¤¨, पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ, फेफड़ा और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•- कैंसरों में से किसी à¤à¤• से शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ जांच में पीड़ित मिले।
शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं ने दिखाया कि सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर से पीड़ित 20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶ महिला और पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ कैंसर से पीड़ित 25 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¥à¤· रोग के पता लगने के बाद कम से कम से कम सात वरà¥à¤· तक जीवित रहे।
लेकिन फेफड़े के कैंसर या मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• कैंसर की तसà¥à¤µà¥€à¤° कहीं जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ दिखी।
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• कैंसर में तो जीवित रहने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ होती है।
रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, फेफड़े के कैंसर से पीड़ित पांच में à¤à¤• रोगी की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होने के à¤à¤• महीने में ही मृतà¥à¤¯à¥ हो जाती है, जबकि 73 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ रोगी साल à¤à¤° के अंदर मर जाते हैं।
हालांकि कैंसर की अनà¥à¤¯ बीमारियों में जीवित रहने की दर इंगà¥à¤²à¥ˆà¤‚ड में पिछले 40 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में बढ़ी है।
मैकमिलन के मà¥à¤–िया सायरन डेवेन ने कहा कि अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के नतीजों में ''à¤à¤¾à¤°à¥€ उतार चढ़ाव'' का पता चला है।
'सबसे बड़ा हतà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾'
बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ लंग फाउंडेशन के चीफ à¤à¤•à¥à¤œà¥€à¤•à¥à¤¯à¥‚टिव डॉ। पेनी वà¥à¤¡à¥à¤¸ ने कहा कि यूरोप और अमरीका के मà¥à¤•़ाबले फेफड़े के कैंसर में जीवन पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¾ का कम रहने के पीछे देरी से पता लगना à¤à¤• बड़ा कारण है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि फेफड़े का कैंसर देश में सबसे बड़ा हतà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ है और हमें सचेत रहना होगा।
फेफड़े के कैंसर के अधिकांश मामले धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ से संबंधित होते हैं जोकि इस बीमारी का सबसे बड़ा कारक है।
हालांकि इसकी दर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में कम हो रही है और महिलाओं में इसका ख़तरा बढ़ रहा है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ विशà¥à¤µà¤¯à¥à¤¦à¥à¤§ और सतà¥à¤¤à¤° के दशक के बाद उनमें धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ की आदत बढ़ी है।
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